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क्योंकि मैं विकलांग हूं ?

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मैं विकलांग हूं लेकिन पहले इंसान हूं, संविधान ने मौलिक अधिकार दिया है, फिर भी शिक्षा और रोजगार से हम वंचित क्यों, क्योंकि मैं विकलांग हूं ? आजादी के 73 वर्षों बाद भी हम तरसते हैं  गरिमा से घूमने की आजादी, गरिमा से खेलने की आजादी, गरिमा से जीने की आजादी, क्योंकि मैं विकलांग हूं ? आसमान को छूने की चाहत हममें भी है, पंख नहीं है तो, हौसलो से, उड़ान भरने की साहस, हम में भी है, फिर अपने आजादी के बरसों बाद भी,  अपने मौलिक अधिकारों से वंचित क्यों ? क्योंकि मैं विकलांग हूं ? अरुण कुमार सिंह  (मेरा यह रचना ग्रामीण विकलांग भाई-बहनों की व्यथा पर है, उनको समर्पित)

आज मध्य प्रदेश विकलांग मंच के महासचिव कुमारी किरण पाटीदार ने बस कंडक्टर को सबक सिखाया।

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कुमारी किरण पाटीदार दीदी जी ने आज मीनाक्षी ट्रैवल्स की बस में जब कंडक्टर द्वारा पहले सीट नही देने व विकलांगता कार्ड दिखाने के बाद भी  70 प्रतीशत किराया लेने पर व अभद्रता पूर्वक व्यवहार करने पर  क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी एवं बस मालिकों के ग्रुप में शिकायत की गई  जिस पर आरटीओ द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए तुरंत बस यूनियन जिला  अध्यक्ष  को फ़ोन लगाकर समस्या से अवगत कराया कहा गया, फिर बस मालिक ने तुरंत कुमारी किरण पाटीदार दीदी को फोन लगाकर उन्हें कार्यवाही न करने का कहा गया, पर दीदी के द्वारा मना कर दिया गया और कहा कि मैं आज इस बस से उतरने के बाद आरटीओ जाकर इस बस का परमिट रद्द  या चालान करवाउंगी, ऐसा कहने पर  बस यूनियन के अध्यक्ष के साथ लगभग 10 बस  मालिक तुरंत जावरा पहुंचे और दीदी से माफी मांगी । दीदी ने पहली बार गलती करने पर माफ किया और चेतावनी दी और कहा कि आगे से ऐसा नहीं होना चाहिए, सभी बस मालिकों एवं बस यूनियन के अध्यक्ष ने वादा किया कि आगे से ऐसा नहीं होगा। फिर दीदी ने कहा कि अगर भविष्य में ऐसा किसी भी विकलांग व्यक्तियों क...

हमनें पटमदा के पीटर सोरेन को अपना दोस्त बनाया

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दिनांक 12 सितंबर 2020 को मैं जब अपने दोस्तों के साथ पटमदा प्रखंड से वापस जमशेदपुर लौट रहा था तो रास्ते में गोबर भूसी के पास पीटर सोरेन जो दृष्टिबाधित व्यक्ति है, सड़क किनारे खड़े होकर भीख मांगते मिला, तो हम लोगों ने वही पास के होटल में उसे बुलाकर बातचीत किया, तब उसने बताया कि मेरे परिवार में मेरे बहन और बूढ़ी मां है और मेरा घर भीख मांगने से चलता है मेरी बहन भी विकलांग है उसे भी दिखाई नहीं देता है। मेरे को और मेरी बहन को विकलांगता पेंशन नहीं मिलता है, मेरे परिवार का राशन कार्ड बना है जिससे 15 किलो अनाज मिलता है। हमारे साथी दिलीप दा ने बताया की लॉकडाउन के दौरान हम लोगों ने इनके परिवार को #झारखंड_विकलांग_मंच एवं अन्य संगठनों के सहयोग से 3 माह तक राशन देने का काम किया है। आज हम, हमारे साथी दिलीप दा एवं विजय सिंह ने पीटर सोरेन को अपना दोस्त बनाया। साथियों बहुत दुःख होता है जब ग्रामीण क्षेत्रों में हमारे विकलांग भाई-बहन सरकार के योजनाओं के लाभ से वंचित रहते है पता नहीं सरकार के अधिकारी एवं कर्मचारी किस तरह कार्य कर रहे हैं, जो व्यक्ति साफ दिख रहा है कि...

श्रद्धांजली। देश के पूर्व मुख्य नि:शक्तता आयुक्त प्रसन्ना कुमार पिंचा हम-सब के आर्दश है

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साथियों,  26 जुलाई 2020 को सुबह का 9:30 का वक्त था मैं अपने पूर्व निधारित वेबिनार मीटिंग के तैयारी कर रहा था तभी राजीव रतूड़ी जी का दिल्ली से फोन आया और उन्होंने कहा कि अरूण अब प्रसन्ना जी हमारे बीच नहीं रहे, मैं यह सुनकर सन्न सा रह गया और राजीव सर को कुछ बोल नही पाया, फिर से राजीव सर ने दोबारा बताया और मैं काफी दुखी हो गया और मेरी आंखें नम हो गई, मै कुछ सोच नही पा रहा था। मैंने वेबिनार मीटिंग को स्थगित कर दिया। मै उन्हें पिछले 13 वर्षों में कई बार मिला और उनके साथ में रहा भी, जब भी हम साथ रहते तो हमेशा गांव में रहने वाले विकलांग व्यक्तियों की स्थिति को लेकर चर्चा होता था और कैसे व्यवस्था में परिवर्तन हो सके, जिससे विकलांग व्यक्तियों के जीवन में बदलाव आ सके, इन सब मुद्दों पर मंथन होता रहता था, जब भी मैं किसी दुविधा में होता था, हमेशा सुझाव लिया करता था, हमारे जैसे बहुत राष्ट्रीय विकलांग मंच के साथी उनसे संपर्क में रहते थे। वह जिनसे भी एक बार मिल लेते थे उसे कभी नहीं भूलते, जब भी मैं मिला सब के बारे में पूछा करते थे। दोस्तों जब गरीब विकलांगों का संगठन इस देश में बनाने की बुनियाद रखा...

सन् 1855 में हुई भारत के आजादी की पहली लड़ाई हुल क्रांती...

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हालांकि आजादी की पहली लड़ाई तो सन 1857 में मानी जाती है जबकि झारखंड के आदिवासियों ने 1855 में ही विद्रोह का झंडा बुलंद कर दिया था। 30 जून, 1855 को सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में मौजूदा साहेबगंज जिले के भगनाडीह गांव से विद्रोह शुरू हुआ था। इस मौके पर सिद्धू ने नारा दिया था, 'करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो' झारखंड के आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाया था यानी विद्रोह किया था, उस दिन को 'हूल क्रांति दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस युद्ध में करीब 20 हजार से अधिक आदिवासी शहीद हुए थे। इस आंदोलन का मुख्य कारण संथाल परगना का इलाका बंगाल प्रेसिडेंसी के अधीन पहाड़ियों एवं जंगलों से घिरा क्षेत्र था। इस इलाके में रहने वाले पहाड़िया, संथाल और अन्य निवासी खेती-बाड़ी करके अपना जीवन-यापन करते थे और जमीन का लगान किसी को नहीं देते थे। ईस्ट इंडिया कंपनी ने राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से जमींदार की फौज तैयार की जो पहाड़िया, संथाल और अन्य निवासियों से जबरन लगान वसूलने लगे। लगान देने के लिए उनलोगों को साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता और साहूकार के भी ...

दुनिया की सबसे खूबसूरत एवं सुन्दर चीजें न कभी देखी जा सकती है और न ही छुई जा सकती है, वो तो सिर्फ और सिर्फ दिल से महसूस की जा सकती हैं – हेलन केलर

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हेलेन एडम्स केलर का जन्म 27 जून 1880 को हुआ और मृत्यु 1 जून 1968 को हुई। हेलेन एडम्स केलर अमेरिका के टस्कंबिया, अलबामा में पैदा हुईं। जन्म के समय हेलन केलर एकदम स्वस्थ्य थी। उन्नीस  महीनों के बाद वो बिमार हो गयी  और उस बिमारी में उनकी देखने की क्षमता, बोलने  और सुनने की शक्ती खत्म हो गयी, जिससे उनके माता-पिता कॉफी चिंतित रहने लगे की हेलन का शिक्षा और सामाजिक विकास कैसे हो सकेगा। फिर उनके अभिभावक ने शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संस्थानों से संपर्क करना शुरू किया तब ऐनी सुलेवन नामक शिक्षिका से मुलाकात हुई और हेलन को शिक्षा  देने के लिए तैयार हुई । तब ऐनी सुलेवन के नेतृत्व में प्रशिक्षण ६ वर्ष की अवस्था से शुरु हुए ४९ वर्षों के साथ में हेलेन सक्रियता और सफलता की ऊंचाइयों तक पहुँची।  हेलन केलर एक अमेरिकी लेखक, राजनीतिक कार्यकर्ता और आचार्य थीं। वह पुरे दुनिया में कला स्नातक की उपाधि अर्जित करने वाली पहली बधिर और दृष्टिहीन थी। बेहतरीन लेखिका हेलन केलर अपनी रचनाओं में युद्ध विरोधी के रूप में नजर आतीं हैं। समाजवादी दल के एक सदस्य के रूप में उन्होंने अमेरिक...

बदले की भावना से काम करना विनाश की ओर ले जाता है- नेल्सन मंडेला

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दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बनने के बाद एक बार नेल्सन मंडेला अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ एक रेस्तरां में खाना खाने गए। सबने अपनी अपनी पसंद का खाना  आर्डर किया और खाना आने का इंतजार करने लगे।  उसी समय मंडेला की सीट के सामने वाली सीट पर एक व्यक्ति अपने खाने का इंतजार कर रहा था। मंडेला ने अपने सुरक्षा कर्मी से कहा कि उसे भी अपनी टेबल पर बुला लो। ऐसा ही हुआ, खाना आने के बाद सभी खाने लगे, वो आदमी भी अपना खाना खाने लगा, पर उसके हाथ खाते हुए कांप रहे थे। खाना खत्म कर वो आदमी सिर झुका कर रेस्तरां से बाहर निकल गया। उस आदमी के जाने के बाद मंडेला के सुरक्षा अधिकारी ने मंडेला से कहा कि वो व्यक्ति शायद बहुत बीमार है़, खाते वख़्त उसके हाथ लगातार कांप रहे थे और वह ख़ुद भी कांप रहा था।  मंडेला ने कहा नहीं ऐसा नहीं है, वह उस जेल का जेलर था, जिसमें मुझे कैद रखा गया था। जब कभी मुझे यातनाएं दी जाती थीं  और मै कराहते हुए पानी मांगता था तो ये मेरे ऊपर पेशाब करता था। मंडेला ने कहा "मै अब राष्ट्रपति बन गया हूं, उसने समझा कि मै भी उसके साथ शायद वैसा ही व्यवहार करूंगा। पर मेरा चरि...

ह्‌यूˈमैनटि फर्स्ट संस्था ने थैलेसीमिया से प्रभावित लोगों को राशन का मदद किया

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जमशेदपुर: अहमदिया मुस्लिम समुदाय की संस्था ह्‌यूˈमैनटि फर्स्ट ने करोना वैश्विक महामारी से प्रभावित गरीब-मजदूर वर्गो के लोगों को शहर में राशन का मदद देने का कार्य लगातार कर रहा है जिसके तहत आज थैलेसीमिया से प्रभावित लोग के परिवारों को एक माह का राशन मुहैया कराने का कार्य किया है जिसके तहत 25 परिवारों को राशन दिया। इस मदद के लिए झारखण्ड थैलेसीमिया विकलांग मंच के अध्यक्ष शेख अहमद अमन ने संस्था के पदाधिकारियों को बहुत-बहुत धन्यवाद दिया। इस कार्य में संस्था के सक्रिय सदस्य नेक मोहम्मद, शब्बीर अहमद चांद, खलील अहमद, इमरान मोहम्मद, तारिक अहमद एवं मुसब्बर मोहम्मद भूमिका निभाई।

विकलांग शेख अहमद अमन को एक हज़ार रूपये पेंशन के लिए जाना पड़ा उच्च न्यायालय

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शेख अहमद अमन एक विकलांग व्यक्ति है और थैलेसिमिया से ग्रसित है जो झारखण्ड विकलांग मंच का सक्रिय सदस्य और झारखण्ड थैलेसिमिया विकलांग मंच का अध्यक्ष है । प्रार्थी झारखंड सरकार के द्वारा लागू स्वामी विवेकानंद निःशक्त स्वावलम्बन योजना के तहत लाभ प्राप्त कर रहा था। उक्त योजना के तहत विकलांग व्यक्ति को हर माह 1 हज़ार रुपया का वितीय लाभ दिया जाता है। परंतु विगत नवंबर 2019 से उसे यह लाभ मिलना बंद हो गया। झारखंड में बहुत सारे विकलांग व्यक्ति को कई महीनों से उक्त स्कीम का लाभ नही मिलने के कारण राज्य निःशक्तता आयोग द्वारा 23 अप्रैल को सरकार को चिट्ठी लिखा गया कि विकलांग व्यक्तियों को जल्द से जल्द योजना का लाभ मिले। इसके बाद सरकार ने उक्त चिट्ठी पर संज्ञान लेते हुए सारे सहायक निदशेक को दिनांक 5 मई को आदेश जारी किया कि वो विकलांग व्यक्तियों के भुगतान को सुनिश्चित करें।  लेकिन झारखंड के बहुत सारे विकलांग व्यक्ति को योजना का लाभ नही मिल पा रहा है। इसी क्रम में प्रार्थी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल किया| जिसमें हाई कोर्ट ने उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम को यह आदेश दिया है कि वो प्रार्थी के मा...

लॉकडाउन से विकलांग राजन कुमार का ट्यूशन सेंटर हुआ बंद जिससे हुई आर्थिक तंगहाली

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राजन कुमार 36 वर्षीए अस्थिबाधित विकलांग व्यक्ति है़ जो सीतारामडेरा रिफ्यूजी कॉलोनी जमशेदपुर में किराया के घर पर रहता है। इनके परिवार में पत्नी, दो बच्चे और पिताजी है। राजन कुमार NET क्वालिफाइड है और कॉमर्स का शिक्षक है जो अपने जीविकापार्जन के लिए ट्यूशन सेंटर चलाते है  जिसमें वर्ग 8 से लेकर B.COM तक पढ़ाई कराते है l इन्होंने बताया कि लॉकडाउन होने से मेरा ट्यूशन सेंटर बंद हो गया है़ जिससे हमारा आय का जरिया भी बंद हो गया, हम अपने घर का किराया भी दो माह से नही दे पाए है और अपने बेटी का स्कूल फिस दो माह से नही दे सका। परिवार का भी खर्चा है छोटे-छोटे दो बच्चे की जरूरत और पापा के दवाइयां यह सब करना जरूरी है और आय का दूसरा कोई साधन भी नही है़, जो थोड़ा बहुत हमने बचत किया था वह भी इस लॉकडाउन के दौरान खत्म हो गया।  बातचीत के दौरान ही उसने कहा की रात को नींद भी नहीं आती आगे कैसे हमारा घर चलेगा और हम अपने परिवार की जिम्मेदारी कैसे निभा पाएंगे क्योंकि मेरे पास परमानेंट जॉब या सरकारी नौकरी नहीं है इतने पढ़ाई करने के बाद भी आज हम बेरोजगार हैं। राजन ने बताया कि मुझे विकलांगता पेशं...

लॉकडाउन के कारण से थैलेसीमिया से प्रभावित अमन है़ परेशान

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शेख अहमद अमन उम्र 38- वर्ष पिता शेख अहमद हुसैन प्रखंड़ मुसाबनी जिला पूर्वी सिंहभूम, झारखंड का रहने वाला है़। उसने बताया कि मै विगत 37वर्षों से थैलेसीमिया रोग से प्रभावित हूं, मुझे प्रति 8 से 12 दिनों के अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती, मेरा घर मुसाबनी से 50 किलोमीटर दूर जमशेदपुर शहर में एक निजी अस्पताल में रक्त चढ़ाने के लिए आना पड़ता है पर लॉकडाउन के कारण घर से अस्पताल-अस्पताल  से पुन: घर आने-जाने के क्रम में मुझे बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है  एवं मुझे इस थैलेसीमिया से रोग के संबंधित बहुत सारी दवाइयों का सेवन करने व पोषक आहार खाने का चिकित्सक का निर्देश है जोकि बहुत महंगा है साथ ही मुझे हेपेटाइटिस सी पॉजिटिव ( H.C.V positive) से भी ग्रसित हूं चिकित्सक का निर्देश है अति शीघ्र इस बीमारी का इलाज अति आवश्यक है, मेरे परिवार में कमाने वाला एकमात्र मेरा छोटा भाई है जो कि एक निजी कंपनी के कार्यालय में कार्यरत था पर लॉकडाउन  की वजह से उसे कार्य से वंचित कर दिया गया, मेरे घर में आय का कोई और भी जरिया नहीं है मेरे घर की आर्थिक परिस्थिति खराब है मेरे पर...

लॉकडाउन होने से अनंत पाल है परेशान आगे कैसे खोल पाउंगा दुकान

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अनंत  पाल जी बारीडीह जमशेदपुर में पान दुकान चलाते हैं उनका विकलांगता अस्थि बाधित है जो दोनो पैर से है। उनका उम्र 49 वर्ष है उनके परिवार में उनके पत्नी एक बेटी और दो बेटा है उन्होंने अपनी बेटी की शादी कर दी है वर्तमान समय में उनके दोनों बेटे 18-19 वर्ष उम्र के हैं जो गरीबी के चलते पढ़ाई नहीं कर पाए और फिलहाल बेरोजगार है। लॉकटाउन होने से इनका दुकान बंद है और आय का कोई दूसरा स्रोत भी नहीं है। लॉकडाउन के समय 70 दिनों के अंदर इनके पास जो भी दुकान का पूंजी था सारा घरेलू खर्च (राशन) में खत्म हो गया है। इन्होंने बताया कि "मुझे चिंता है लॉकडाउन खत्म होने पर दुकान कि शुरूआत कैसे करूंगा और अगर लॉकडाउन बढ़ेगा तो हमारा घर का खर्चा कैसे चलेगा इस वक्त उधार में भी कोई दुकानदार राशन हम जैसे गरीब लोगो को नही देगा, बहुत मुशकिल लग रहा है़ जीनें के लिए, इससे अच्छा होता की भगवान मुझे मौत दे दे" यह बताते हुए उसके आंखो से आंसू आने लगा और रो पडा़।  फिर बात-चीत के दौरान बताया कि उसे विकलांगता पेशंन मिलता है़ और राशन कार्ड बना जिससे चावल मिल जाता है़ लेकिन कैैसे चलेगा परिवार का खर्चा।

भीख भी मिलना बंद हो गया, सर लॉकडॉन में

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पीटर सोरेन एवं शालिनी सोरेन दोनों ही भाई-बहन दृष्टिहीन है। दोनों भाई-बहन ने बताया कि  अपने आजीविका  के लिए  भीख मांग कर  गुजारा करते है भीख नही मिलने पर हमे भूखा ही सोना पडता है़। पर लॉकडाउन होने से भीख मांगना भी बंद हो गया है़ जिससे भुखमरी की स्थिति सामने आ खड़ी हुई है। कभी-कभी गांव के लोग खाना देते है़ तो खाता हूं । उसने बताया कि जब से लॉकडाउन शुरू हुआ तब से गांव का चौकीदार थाना से दोपहर में खाना लाकर देता है़ जिससे हमारे परिवार का गुजारा चल रहा है़।  यह बामनी गांव के रहने वाले है़ जो खेरूआ पंचयात, पटमदा प्रखण्ड, जिला-पूर्वी सिहंभूम झारखण्ड का है। इनके परिवार में बूढ़ी मां है़ इनके पिता गोविंद सोरेन 30 वर्ष पहले ही इंतकाल हो गया। आज से 40 साल पहले इनके पिता ने ईसाई धर्म अपनाया था। इन दोनों को विकलांगता पेशंन नही मिलता है़ ना ही इनके मां को वृद्धा पेंशन। इन लोगो का राशन कार्ड भी नही बना हुआ है़। अभी इनलोगों का  बहुत ही दयनीय अवस्था है।

देश के पांच हजार से अधिक दिव्यांगों ने ट्वीट कर कहा "PM हमारी भी सुनो"

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दिनांक 07 जून 2020 को राष्ट्रीय विकलांग मंच के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना वैश्विक महामारी व देशव्यापी लॉकडाउन में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण हेतु *PM को ट्वीट करो अभियान* #pmहमारीभीसुनोrvm चलाया गया जिसमें पूरे देश से पांच हजार से अधिक विकलांगजनों ने ट्वीट किया।  माननीय प्रधानमंत्री महोदय को दिव्यांगजनो के 11 सूत्रीय मांग से अवगत कराते हेतु हर राज्य से दिव्यांगजनों/संस्था व सहयोगियों ने ट्वीट किया। राष्ट्रीय विकलांग मंच का 11 सूत्रीय मांग जो इस प्रकार है- 1. दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर सभी दिव्यांगजन को सर्वभौमिक राशन (सभी तरह के घरेलू खाद्य सामग्री ) दी जाए और Home delivery  की  व्यवस्था हो। 2. केंद्र सरकार द्वारा घोषित कोरोना सहायता राशि ₹ 1000/- देश के सभी दिव्यांगजन जिनकी दिव्यांगता 40% से उपर है उनको दिया जाए और one nation one pension योजना की शुरूआत हो। 3. जो दिव्यांगजन अर्धसरकारी/गैरसरकारी/निजी या कंपनी में कार्यरत हैं उन्हें लॉकडाउन के अवधि या कोरोना अवधि में बाहर न किया जाए। 4. स्वरोजगार करने वाले वैसे दिव्यांगजन जिन्हें इस महामारी के दौरान ...