श्रद्धांजली। देश के पूर्व मुख्य नि:शक्तता आयुक्त प्रसन्ना कुमार पिंचा हम-सब के आर्दश है
साथियों,
26 जुलाई 2020 को सुबह का 9:30 का वक्त था मैं अपने पूर्व निधारित वेबिनार मीटिंग के तैयारी कर रहा था तभी राजीव रतूड़ी जी का दिल्ली से फोन आया और उन्होंने कहा कि अरूण अब प्रसन्ना जी हमारे बीच नहीं रहे, मैं यह सुनकर सन्न सा रह गया और राजीव सर को कुछ बोल नही पाया, फिर से राजीव सर ने दोबारा बताया और मैं काफी दुखी हो गया और मेरी आंखें नम हो गई, मै कुछ सोच नही पा रहा था। मैंने वेबिनार मीटिंग को स्थगित कर दिया। मै उन्हें पिछले 13 वर्षों में कई बार मिला और उनके साथ में रहा भी, जब भी हम साथ रहते तो हमेशा गांव में रहने वाले विकलांग व्यक्तियों की स्थिति को लेकर चर्चा होता था और कैसे व्यवस्था में परिवर्तन हो सके, जिससे विकलांग व्यक्तियों के जीवन में बदलाव आ सके, इन सब मुद्दों पर मंथन होता रहता था, जब भी मैं किसी दुविधा में होता था, हमेशा सुझाव लिया करता था, हमारे जैसे बहुत राष्ट्रीय विकलांग मंच के साथी उनसे संपर्क में रहते थे। वह जिनसे भी एक बार मिल लेते थे उसे कभी नहीं भूलते, जब भी मैं मिला सब के बारे में पूछा करते थे। दोस्तों जब गरीब विकलांगों का संगठन इस देश में बनाने की बुनियाद रखा जा रहा था तो इस शख्स ने उस बुनियाद में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई जो आज राष्ट्रीय विकलांग मंच के नाम से जाना जाता है। पिचां सर राष्ट्रीय विकलांग मंच के संस्थापक सदस्यों में एक थे। वह हमारे बीच नहीं है लेकिन उनसे प्राप्त शिक्षा हमारे अंदर समाहित है हम उनके बताए हुए रास्ते पर चलते रहेंगे, हक और बदलाव की लड़ाई को आगे बढ़ाते रहेंगे।
आइए जाने उनके बारे में:- श्री प्रसन्न कुमार पिजां जी को भारत सरकार ने तीन वर्षों के कार्यकाल के लिए मुख्य आयुक्त के रूप में नियुक्त किया था। श्री पिंचा ने 28 दिसंबर, 2011 से 27 दिसंबर, 2014 तक मुख्य आयुक्त के रूप में काम किया। देश में यह पहली बार है कि विकलांग व्यक्ति को देश में विकलांग व्यक्तियों के लिए मुख्य आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया। मुख्य आयुक्त का पद सरकार के सचिव के पद के बराबर होता है।
श्री पिंचा अपने जन्म के बाद से ही दृष्टिबाधित थे । श्री पिंचा जोरहाट (राजस्थान) में ब्लाइंड के लिए सरकारी संस्थान के पूर्व संस्थापक प्राचार्य हैं। असम सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक के पद पर कार्य किया है और भारत के उत्तर-पूर्व के एक्शनएड (एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ) के वरिष्ठ प्रबंधक और एक पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक-कम-नेशनल थीम लीडर, विकलांग लोगों के अधिकारों के संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन पर एक्शनएड के काम की देखभाल किए थे। विकलांगों के लिए मुख्य आयुक्त के रूप में उनके द्वारा प्रभार ग्रहण करने से पहले वे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के साथ इसके विशेष संबंध (विकलांग व्यक्ति) के रूप में भी जुड़े थे। वर्तमान में भी, वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के साथ विकलांग व्यक्तियों के लिए अपने विशेष संबंध के रूप में जुड़े हुए थे। उन्होंने एक अन्य वैधानिक निकाय, अर्थात्, ऑटिज़्म के साथ व्यक्तियों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय ट्रस्ट, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक प्रतिशोध, और इसके अध्यक्ष के रूप में कई विकलांगों का नेतृत्व किया। इस प्रकार, वह अब तक देश का एकमात्र ऐसा व्यक्ति है, जिसके पास दो वैधानिक निकाय हैं।
इन्होंने लॉ ग्रेजुएट और अंग्रेजी में मास्टर्स डिग्री धारक है, श्री पिंचा को विशेष रूप से कानूनी और न्यायिक वकालत के लिए जाना जाता है। वह वर्ष 1999 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी (नेत्रहीन विकलांग) के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया तत्कालीन भारत के राष्ट्रपति द्वारा।
अपने पूरे जीवन में विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों के अलावा एक्शनएड अंतराष्ट्रीय संस्थान के साथ अन्य गरीबों और सबसे अधिक हाशिए वाले समूहों के साथ भी काम किया, उन्होंने देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र के सबसे कठिन इलाकों में सबसे गरीब और सबसे हाशिए पर रहने वाले समुदायों के साथ काम किया था।
विकलांग व्यक्तियों के लिए मुख्य आयुक्त के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों को सरकार के द्वारा सराहा गया है। मुख्य आयुक्त के रूप में उनके द्वारा पारित किए गए आदेशों में विकलांग व्यक्तियों के जीवन पर दूरगामी और सकारात्मक प्रभाव होंगे।
"हम सब आपको, भूल ना पाएंगे,
आपके बताए हुए रास्ते पर,
अपना कदम बढ़ाएंगे,
हमनें ठाना है, बदलाव तो,
एक दिन, जरूर लाएंगे,
विकलांगों के जीवन में, रोशनी फैलाऐंगे।"
अरूण कुमार सिंह
महासचीव (राष्ट्रीय विकलांग मंच)


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