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कहानी

शिप्रा का रिजर्वेशन जिस बोगी में था, उसमें लगभग सभी लड़के ही थे । टॉयलेट जाने के बहाने शिप्रा पूरी बोगी घूम आई थी, मुश्किल से दो या तीन औरतें होंगी । मन अनजाने भय से काँप सा गया । पहली बार अकेली सफर कर रही थी, इसलिये पहले से ही घबराई हुई थी। अतः खुद को सहज रखने के लिए चुपचाप अपनी सीट पर मैगज़ीन निकाल कर पढ़ने लगी । नवयुवकों का झुंड जो शायद किसी कैम्प जा रहे थे, के हँसी - मजाक , चुटकुले उसके हिम्मत को और भी तोड़ रहे थे । शिप्रा के भय और घबराहट के बीच अनचाही सी रात धीरे - धीरे उतरने लगी । सहसा सामने के सीट पर बैठे लड़के ने कहा -- " हेलो , मैं साकेत और आप ? " भय से पीली पड़ चुकी शिप्रा ने कहा --" जी मैं ........." "कोई बात नहीं , नाम मत बताइये । वैसे कहाँ जा रहीं हैं आप ?" शिप्रा ने धीरे से कहा--"इलाहबाद" "क्या इलाहाबाद... ? वो तो मेरा नानी -घर है। इस रिश्ते से तो आप मेरी बहन लगीं । खुश होते हुए साकेत ने कहा । और फिर इलाहाबाद की अनगिनत बातें बताता रहा कि उसके नाना जी काफी नामी व्यक्ति हैं , उसके दोनों मामा सेना के उच्च...

वकालत कर सफलताएं

विकलांग महिलाएं कि चयन सखी सह पोषण परामर्शी में। सखी सह पोषण परामर्शी के निकले विज्ञापन में दिव्यांग जनों को अलग से  अंक एवं प्राथमिकता देने की बात का उल्लेख नहीं था जिस से लेकर झारखंड विकलांग मंच के सचिव नरेंद्र प्रसाद सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंड़ल वर्ष 2016 के तत्कालीन महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव मुख्यमीत सिंह भाटिया एवं राज्य निशक्तता आयुक्त  श्री सतीश चंद्रा से मिलकर अधिसूचना में संशोधन करने की मांग रखा था परिणाम स्वरुप कैबिनेट  ने एक अधिसूचना जारी कर दिव्यांग जनों के लिए मेधा सूची में 10 अंक एवं प्राथमिकता देने की निर्देश जारी किया जिसके उपरांत बहुत सारे दिव्यांग महिलाओं का नियुक्ति भी हुआ लेकिन इटखोरी एवं गिद्धौर में दिव्यांग महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया जिस मुद्दे को लेकर झारखंड विकलांग मंच लगातार वकालत कर रहा था परिणाम स्वरुप उक्त केंद्रों पर हुए नियुक्ति को राज निशक्तता आयुक्त ने संदिग्ध करार देते हुए  रद्द कर 24 सितंबर 2018 तक नियुक्त करने का आदेश जारी किया है।

महामहिम राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करते हुए झारखंड विकलांग मंच के प्रतिनिधिमंडल

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