युद्ध की आग में विकलांग जन – उपेक्षित और अनदेखी चुनौती
वर्तमान में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संघर्ष ने एक बार फिर सीमा क्षेत्रों में नागरिकों के लिए एक भयावह स्थिति उत्पन्न कर दी है। कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात जैसे संवेदनशील इलाकों में बमबारी, सैन्य संघर्ष और आतंकवाद के प्रभाव से न केवल सामान्य नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि विकलांग जनों की स्थिति और भी जटिल हो गई है। युद्ध के दौरान विकलांग व्यक्तियों की सुरक्षा, सहायता और चिकित्सा सेवाओं की उपेक्षा एक गंभीर मानवीय संकट बनकर उभरती है। विकलांग जनों की उपेक्षा: वर्तमान संघर्ष में विकलांग जनों के लिए परिस्थितियाँ और भी कठिन हो गई हैं। बमबारी और हमलों के दौरान उनके पास बुनियादी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होती। न तो व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित मार्ग होते हैं, न ही संकेत भाषा जानने वाले स्वयंसेवकों की व्यवस्था होती है, और न ही राहत शिविरों में समुचित सहायक उपकरण की व्यवस्था होती है। कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां विकलांग व्यक्तियों को आपातकालीन परिस्थितियों में सही समय पर राहत नहीं मिल पाई, और उनका जीवन और भी कठिन हो गया। हालांकि, किसी ठोस रिपोर्ट में यह नहीं ...