संदेश

मई, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

युद्ध की आग में विकलांग जन – उपेक्षित और अनदेखी चुनौती

चित्र
वर्तमान में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संघर्ष ने एक बार फिर सीमा क्षेत्रों में नागरिकों के लिए एक भयावह स्थिति उत्पन्न कर दी है। कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात जैसे संवेदनशील इलाकों में बमबारी, सैन्य संघर्ष और आतंकवाद के प्रभाव से न केवल सामान्य नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि विकलांग जनों की स्थिति और भी जटिल हो गई है। युद्ध के दौरान विकलांग व्यक्तियों की सुरक्षा, सहायता और चिकित्सा सेवाओं की उपेक्षा एक गंभीर मानवीय संकट बनकर उभरती है। विकलांग जनों की उपेक्षा: वर्तमान संघर्ष में विकलांग जनों के लिए परिस्थितियाँ और भी कठिन हो गई हैं। बमबारी और हमलों के दौरान उनके पास बुनियादी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होती। न तो व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित मार्ग होते हैं, न ही संकेत भाषा जानने वाले स्वयंसेवकों की व्यवस्था होती है, और न ही राहत शिविरों में समुचित सहायक उपकरण की व्यवस्था होती है। कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां विकलांग व्यक्तियों को आपातकालीन परिस्थितियों में सही समय पर राहत नहीं मिल पाई, और उनका जीवन और भी कठिन हो गया। हालांकि, किसी ठोस रिपोर्ट में यह नहीं ...

"दृष्टिहीनता नहीं, बल्कि दृष्टिकोण मायने रखता है" — मनू गर्ग (IAS) की प्रेरक यात्रा

चित्र
"दृष्टिहीनता नहीं, बल्कि दृष्टिकोण मायने रखता है" — मनू गर्ग (IAS) की प्रेरक यात्रा "जब इरादे बुलंद हों तो राहें खुद-ब-खुद बन जाती हैं।" इस कहावत को सच्चाई में बदल कर दिखाया है मनू गर्ग ने, जिन्होंने UPSC 2024 में ऑल इंडिया रैंक 91 हासिल कर यह सिद्ध कर दिया कि दिव्यांगता किसी भी लक्ष्य को पाने की राह में बाधा नहीं बन सकती। राजस्थान के रहने वाले मनू गर्ग ने कक्षा 8 में अपनी दृष्टि एक दुर्लभ आनुवंशिक रोग के कारण खो दी थी। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। एक दृष्टिबाधित छात्र होते हुए भी, उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक किया और फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पोस्ट ग्रेजुएशन। वर्तमान में वे JNU से दक्षिण एशियाई अध्ययन में पीएचडी कर रहे हैं। मनू की सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान उनकी मां वंदना जैन का रहा, जो एक सिंगल मदर हैं। उन्होंने न सिर्फ पाठ्यपुस्तकों को पढ़कर सुनाया, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मनू को हमेशा सहारा दिया। मनू ने ब्रेल के बजाय टेक्नोलॉजी ...