क्योंकि मैं विकलांग हूं ?

मैं विकलांग हूं लेकिन पहले इंसान हूं,
संविधान ने मौलिक अधिकार दिया है,
फिर भी शिक्षा और रोजगार से हम वंचित क्यों,
क्योंकि मैं विकलांग हूं ?

आजादी के 73 वर्षों बाद भी हम तरसते हैं 
गरिमा से घूमने की आजादी,
गरिमा से खेलने की आजादी,
गरिमा से जीने की आजादी,
क्योंकि मैं विकलांग हूं ?

आसमान को छूने की चाहत हममें भी है,
पंख नहीं है तो, हौसलो से,
उड़ान भरने की साहस, हम में भी है,
फिर अपने आजादी के बरसों बाद भी, 
अपने मौलिक अधिकारों से वंचित क्यों ?
क्योंकि मैं विकलांग हूं ?

अरुण कुमार सिंह 
(मेरा यह रचना ग्रामीण विकलांग भाई-बहनों की व्यथा पर है, उनको समर्पित)

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