भीख भी मिलना बंद हो गया, सर लॉकडॉन में

पीटर सोरेन एवं शालिनी सोरेन दोनों ही भाई-बहन दृष्टिहीन है। दोनों भाई-बहन ने बताया कि  अपने आजीविका  के लिए  भीख मांग कर  गुजारा करते है भीख नही मिलने पर हमे भूखा ही सोना पडता है़। पर लॉकडाउन होने से भीख मांगना भी बंद हो गया है़ जिससे भुखमरी की स्थिति सामने आ खड़ी हुई है। कभी-कभी गांव के लोग खाना देते है़ तो खाता हूं । उसने बताया कि जब से लॉकडाउन शुरू हुआ तब से गांव का चौकीदार थाना से दोपहर में खाना लाकर देता है़ जिससे हमारे परिवार का गुजारा चल रहा है़।  यह बामनी गांव के रहने वाले है़ जो खेरूआ पंचयात, पटमदा प्रखण्ड, जिला-पूर्वी सिहंभूम झारखण्ड का है। इनके परिवार में बूढ़ी मां है़ इनके पिता गोविंद सोरेन 30 वर्ष पहले ही इंतकाल हो गया। आज से 40 साल पहले इनके पिता ने ईसाई धर्म अपनाया था। इन दोनों को विकलांगता पेशंन नही मिलता है़ ना ही इनके मां को वृद्धा पेंशन। इन लोगो का राशन कार्ड भी नही बना हुआ है़। अभी इनलोगों का  बहुत ही दयनीय अवस्था है।

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