हमनें पटमदा के पीटर सोरेन को अपना दोस्त बनाया
दिनांक 12 सितंबर 2020 को मैं जब अपने दोस्तों के साथ पटमदा प्रखंड से वापस जमशेदपुर लौट रहा था तो रास्ते में गोबर भूसी के पास पीटर सोरेन जो दृष्टिबाधित व्यक्ति है, सड़क किनारे खड़े होकर भीख मांगते मिला, तो हम लोगों ने वही पास के होटल में उसे बुलाकर बातचीत किया, तब उसने बताया कि मेरे परिवार में मेरे बहन और बूढ़ी मां है और मेरा घर भीख मांगने से चलता है मेरी बहन भी विकलांग है उसे भी दिखाई नहीं देता है। मेरे को और मेरी बहन को विकलांगता पेंशन नहीं मिलता है, मेरे परिवार का राशन कार्ड बना है जिससे 15 किलो अनाज मिलता है। हमारे साथी दिलीप दा ने बताया की लॉकडाउन के दौरान हम लोगों ने इनके परिवार को #झारखंड_विकलांग_मंच एवं अन्य संगठनों के सहयोग से 3 माह तक राशन देने का काम किया है।
साथियों बहुत दुःख होता है जब ग्रामीण क्षेत्रों में हमारे विकलांग भाई-बहन सरकार के योजनाओं के लाभ से वंचित रहते है पता नहीं सरकार के अधिकारी एवं कर्मचारी किस तरह कार्य कर रहे हैं, जो व्यक्ति साफ दिख रहा है कि इनको मदद की जरूरत है वह सरकारी लाभ से वंचित है। आज गांवों में पंचायत कार्यालय है हर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र है उसके बाद भी सबसे पिछड़े वर्ग विकलांगजन सरकार के सुविधाओं से वंचित है, यह कैसी व्यवस्था है जो अंतिम व्यक्ति तक लाभ नहीं पहुंच पाती। इसमें सुधार की जरूरत है हम चाहते हैं लोग देखें और सुधार का पहल करें।
धन्यवाद।
सभी दोस्तों से निवेदन है जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके शेयर करें जिसे बदलाव आ सकें।
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