कविता "मैंने जिनके लिए लड़ा"!
"पिछले 16 वर्षों से न्याय और अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए...
**मैंने जिनके लिए लड़ा,
वो मेरे अपने नहीं हैं।
मैं जिनसे लड़ा,
वे मेरे दुश्मन नहीं हैं।।
लड़ा हूँ मैं सच के लिए,
बस इतना ही मेरा कर्म है।
न कोई मेरा था, न कोई पराया,
मैंने तो बस हक़ का दीप जलाया।।"**
~~ अरुण कुमार सिंह ~~
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